मुख्य सूचना आयुक्त के खिलाफ जांच के आदेश
मुख्य सूचना आयुक्त के खिलाफ जांच के आदेश
बीकानेर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना नहीं देने के आरोप में कोर्ट ने मुख्य सूचना आयुक्त टी. श्रीनिवासन व आईपीएस अधिकारी सहित आठ अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जांच के आदेश दिए हैं।
न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण मामलात देवेंद्र जोशी ने सवरेदय बस्ती निवासी गोवर्धन सिंह की ओर से दायर इस्तगासे पर यह निर्देश भी दिए कि अधिकारियों के खिलाफ अपराध पाए जाने पर नियमित प्रकरण दर्ज करें और जांच व नतीजे से न्यायालय को अवगत कराएं।
इस्तगासे में टी. श्रीनिवासन के अलावा पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एम.डी.कोरानी, तत्कालीन एसपी राघवेंद्र सुहासा, डॉ. हबीब खां गौराण, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सतीश चंद्र जांगिड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) ओमप्रकाश जांगिड़ सहित पुलिस व राजस्थान सूचना आयोग के अन्य अधिकारी और कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं।
मामले के अनुसार पुलिस ने वर्ष 2010 में सवरेदय बस्ती निवासी गोवर्धन सिंह के विरुद्ध हिस्ट्रीशीट खोली थी। पुलिस ने उसके घर से सामान व गाड़ी जब्त कर ली और मकान पर ताला जड़ दिया था। यह मामला विधानसभा में भी गूंजा।
परिवादी की पत्नी सुशीला कंवर ने इस संबंध में सूचना के अधिकार के तहत 29 मार्च 2010 को पुलिस महानिदेशक के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। आरोप है कि अधिकारियों ने उन्हें चाही गई सूचना उपलब्ध नहीं करवाई।
उसके बाद सुशील कंवर ने 18 मई 2010 को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) प्रदीप व्यास के समक्ष अपील की लेकिन उसकी भी सुनवाई नहीं हुई। बाद में सूचना आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक को बिंदुवार जवाब देने के आदेश दिए थे लेकिन उसकी भी पालना नहीं की गई।
इस पर सूचना आयोग ने महानिदेशक को तलब कर लिया। 22 फरवरी 2011 को आयोग की डबल बैंच की सुनवाई में महानिदेशक के स्थान पर उपनिरीक्षक कानसिंह उपस्थित हुए।
टी. श्रीनिवासन व एम.डी.कोरानी ने द्वितीय अपील की सुनवाई में दोनों पक्षों की बहस सुनकर आदेश पारित किया था। आदेश की प्रति परिवादी के घर मई 2011 में रजिस्टर्ड डाक से पहुंची। परिवादी गोवर्धन सिंह का आरोप है कि टी.श्रीनिवासन और एम.डी. कोरानी ने पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए आदेश बदल दिया।
बीकानेर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना नहीं देने के आरोप में कोर्ट ने मुख्य सूचना आयुक्त टी. श्रीनिवासन व आईपीएस अधिकारी सहित आठ अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जांच के आदेश दिए हैं।
न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण मामलात देवेंद्र जोशी ने सवरेदय बस्ती निवासी गोवर्धन सिंह की ओर से दायर इस्तगासे पर यह निर्देश भी दिए कि अधिकारियों के खिलाफ अपराध पाए जाने पर नियमित प्रकरण दर्ज करें और जांच व नतीजे से न्यायालय को अवगत कराएं।
इस्तगासे में टी. श्रीनिवासन के अलावा पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एम.डी.कोरानी, तत्कालीन एसपी राघवेंद्र सुहासा, डॉ. हबीब खां गौराण, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सतीश चंद्र जांगिड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) ओमप्रकाश जांगिड़ सहित पुलिस व राजस्थान सूचना आयोग के अन्य अधिकारी और कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं।
मामले के अनुसार पुलिस ने वर्ष 2010 में सवरेदय बस्ती निवासी गोवर्धन सिंह के विरुद्ध हिस्ट्रीशीट खोली थी। पुलिस ने उसके घर से सामान व गाड़ी जब्त कर ली और मकान पर ताला जड़ दिया था। यह मामला विधानसभा में भी गूंजा।
परिवादी की पत्नी सुशीला कंवर ने इस संबंध में सूचना के अधिकार के तहत 29 मार्च 2010 को पुलिस महानिदेशक के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। आरोप है कि अधिकारियों ने उन्हें चाही गई सूचना उपलब्ध नहीं करवाई।
उसके बाद सुशील कंवर ने 18 मई 2010 को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) प्रदीप व्यास के समक्ष अपील की लेकिन उसकी भी सुनवाई नहीं हुई। बाद में सूचना आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक को बिंदुवार जवाब देने के आदेश दिए थे लेकिन उसकी भी पालना नहीं की गई।
इस पर सूचना आयोग ने महानिदेशक को तलब कर लिया। 22 फरवरी 2011 को आयोग की डबल बैंच की सुनवाई में महानिदेशक के स्थान पर उपनिरीक्षक कानसिंह उपस्थित हुए।
टी. श्रीनिवासन व एम.डी.कोरानी ने द्वितीय अपील की सुनवाई में दोनों पक्षों की बहस सुनकर आदेश पारित किया था। आदेश की प्रति परिवादी के घर मई 2011 में रजिस्टर्ड डाक से पहुंची। परिवादी गोवर्धन सिंह का आरोप है कि टी.श्रीनिवासन और एम.डी. कोरानी ने पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए आदेश बदल दिया।

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