सलाखें काट 14 कैदी फरार





जालोर। जिला मुख्यालय की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल की सलाखें काटकर बुधवार रात 14 विचाराधीन कैदी फरार हो गए। सूचना पर पुलिस ने पूरे शहर में नाकाबंदी करवाई। जिस पर एक कैदी को शहर के गौड़ीजी क्षेत्र स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया, अन्य 13 कैदी पुलिस गिरफ्त से दूर हैं।

जिला कारागार में बुधवार रात कैदियों ने फिल्मी अंदाज में भजन सन्ध्या रखी। हार्मोनियम व भजन संध्या के शोर में एक सोची-समझी साजिश के तहत बैरक के ऊपरी हिस्से में लगी सलाखो को काटा गया। देर रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच एक-एक कर कुल 14 कैदी जेल से भाग निकले। जेल के एक प्रहरी के शोर मचाने पर बैरक के अन्य कैदी बैरक में ही रूक गए। कैदियो के भागने की सूचना तत्काल जिला पुलिस को दी गई। इस पर पूरे शहर में नाकाबंदी कराई। बाद में एक कैदी भीमाराम पुत्र मोड़ाराम माली निवासी गौड़ीजी क्षेत्र जालोर को उसके घर से गिरफ्तार किया। अन्य आरोपियों का देर शाम तक कोई सुराग नहीं लग पाया।

भागने वालो में कई कुख्यात
फरार होने वालों में कई कुख्यात अपराधी भी शामिल हैं। इनमें अफीम के साथ पकड़ा गया प्रतापगढ़ जिले का कमलसिंह भी शामिल है। इसके अलावा हत्या के दो आरोपी जालोर जिले के रेवतड़ा कस्बे का गजेन्द्रसिंह और जालोर निवासी भीमाराम माली है। भीमाराम को पुलिस ने देर रात उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

हत्या के प्रयास का आरोपी जोधपुर जिले का मेघसिंह, एनडीपीएस मामलों में चित्तौड़गढ़ जिले के किशनलाल व रंगलाल मेघवाल तथा बाड़मेर जिले के भागीरथ विश्नोई और गणेशाराम जाट शामिल हैं। बलात्कार जैसे संगीन जुर्म के आरोपी जालोर जिले के करड़ा निवासी भाखराराम लुहार, पाली जिले का खुशालचंद और जोधपुर जिले का प्रदीप राव भी फरार हो गया। इसके अलावा चोरी के आरोपी भीनमाल निवासी उत्तम, जोधपुर निवासी कालूसिंह राजपूत और बालोतरा निवासी किशोर जटिया भी इनमें शामिल है।

इनका कहना...
जालोर जिला कारागार में कैदियो के भागने की यह पहली घटना है। कहीं चूक अवश्य रही है। आरी पत्ती कैसे अंदर गई और किसने भागने में सहायता की, इसकी जांच की जा रही है। दोषियो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- ओमेन्द्र भारद्वाज, महानिदेशक, जेल

जेलर व हवलदार निलम्बित
जालोर. इधर देर शाम डीजी ओमेन्द्र भारद्वाज ने पूरे प्रकरण में जेलर व हवलदार को जिम्मेदार मानते हुए निलम्बित कर दिया। भारद्वाज ने बताया कि जिला कारागार के जेलर धन्नाराम धौर्नर और हवलदार दलपतसिंह की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए निलम्बित कर दिया गया।
पहले भी हुई घटनाएं
पाली, जालोर व सिरोही जिलों में पहले भी कैदियों के फरार होने की घटनाएं हुई हैं। जेल एवं कारागार विभाग यदि जिला जेलों में पहले हुई घटनाओं से सबक लेता तो यह वारदात पेश नहीं आती।
पाली
वर्ष 2009 में सोजत जेल में एक कैदी ने की फंदा लगाकर आत्महत्या।
जुलाई 2010 में बाली जेल से चार कैदी फरार।
सिरोही
अप्रेल 2009 में जिला कारागार से चार कैदी फरार हुए थे।
जालोर
2008 में केशवना खुली जेल से साथी की हत्या कर फरार हुआ कैदी।
अप्रेल 2009 में फरार हुआ एक कैदी।

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